अब मंगलवार को होगी अगली सुनवाई, विभागीय सचिव व डीजीपी हाईकोर्ट में रखेंगे तथ्य, चारधाम यात्रा, कांवड़, आपदा व बन्द सड़कों से उपजी विषम स्थिति पर हुई बहस
नैनीताल/ देहरादून। नैनीताल हाईकोर्ट ने पंचायत चुनाव की तारीख को आगे खिसकाने सम्बन्धी याचिका को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पंचायती राज सचिव व डीजीपी को सुरक्षात्मक उपायों के बाबत कोर्ट के समक्ष तथ्य पेश करने को कहा।
शुक्रवार को हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने कहा कि दोनों अधिकारी इस बाबत सरकार की आकस्मिक योजना पेश करें। संकट के समय स्थिति को कैसे संभाला जाएगा। याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में विभिन्न कारणों का उल्लेख करते हुए पंचायत चुनाव की तिथि आगे खिसकाने की मांग की है।
गौरतलब है कि प्रदेश के पंचायत चुनाव में 24 व 28 जुलाई को दो चरणों में मतदान होना है। याचिका कर्ता ने कहा कि राज्य में गम्भीर आपदा व बरसात के मौसम में पंचायत चुनाव का कार्यक्रम जारी किया गया। आपदा की वजह से प्रदेश की दर्जनों सड़कें बन्द होने से ग्रामीण इलाकों में आवाजाही ठप हो गयी है। ऐसे में चुनाव प्रचार व मतदान पर विपरीत असर पड़ेगा। आज से विधिवत रूप से कांवड़ यात्रा भी शुरू हो गयी है। लाखों की संख्या में कांवड़िए उत्तराखण्ड की ओर कूच कर रहे हैं। प्रदेश के कई पर्वतीय जिलों में कांवड़िए पहुंच रहे हैं।
यही नहीं, चारधाम यात्रा के चलने से प्रतिदिन हजारों तीर्थयात्री उत्तराखण्ड पहुंच रहे हैं। कुल मिलाकर उत्तराखण्ड के हरिद्वार से लेकर पर्वतीय जिलों में भारी जनसैलाब उमड़ रहा है।कांवड़ यात्रा, आपदा प्रभावित इलाके और चारधाम यात्रा के लिए आवश्यक सुरक्षा बलों पर भी भारी बोझ देखा जा रहा है। पुलिस- प्रशासन की सीमित टीम आपदा व पंचायत चुनाव के अलावा कांवड़ियों के लिए व्यवस्था बनाने में जुटी है। इससे अन्य जिलों में सुरक्षा बलों की कमी भी देखी जा रही है।
याचिकाकर्ता ने चारधाम यात्रा,आपदा, पंचायत चुनाव, कांवड़ यात्रा एक ही समय पर हो रही है। ऐसे में सभी मोर्चों पर जूझना काफी कठिन माना जा रहा है। लिहाजा, त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव जुलाई महीने के बजाय अन्य महीने में आयोजित किये जायें।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की लीगल टीम ने अपना पक्ष भी रखा। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने किसी भी संकट की घड़ी से निपटने के लिए डीजीपी व पंचायत सचिव को आकस्मिक योजना पेश करने को कहा है। मंगलवार को राज्य सरकार समूची व्यवस्था को लेकर कोर्ट में तथ्य पेश करेंगे।
नैनिताल/देहरादून। नगर निकायों और पंचायत दोनों की मतदाताओं सूची में शामिल नाम को लेकर मामला अब उच्च न्यायालय पहुंच गया है। शक्ति सिंह बर्त्वाल द्वारा दाखिल याचिका पर आज यानी शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश और न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंड पीठ पर सुनवाई होगी।
उल्लेखनीय है कि राज्य में नगर निकायों त्रिस्तरीय पंचायत की मतदाता सूची में एक साथ नाम शामिल होने को लेकर रिटर्निंग अधिकारियों ने अलग-अलग निर्णय दिए हैं जिसे लेकर पंचायत चुनाव में कुछ लोगों के नामांकन रद्द हो गए हैं, तो कुछ लोगों के नामांकन को स्वीकृति मिल गई है। याचिका कर्ता के के अधिवक्ता अभीजय नेगी का प्रश्न है कि देश में किसी भी राज्य में मतदाता सूची में दो अलग-अलग निकायों में नाम होना आपराधिक श्रेणी में आता है। ऐसे में उत्तराखंड राज्य में निर्वाचन आयोग द्वारा किस आधार पर ऐसे लोगों के निर्वाचन को स्वीकृति प्रदान की जा रही है अब कल शुक्रवार को तय होगा कि राज्य के ऐसे मतदाताओं और चुनाव में भाग लेने वाले प्रत्याशियों को कोर्ट मान्यता देता है या नहीं कोर्ट का रुख तय करेगा।
गौरतलब होकर उपरोक्त प्रकरण में शिकायतकर्ता शक्ति सिंह वर्तमान द्वारा आयुक्त उत्तराखंड राज्य निर्वाचन आयोग रिंग रोड देहरादून को दिनांक 7 जुलाई एवं दिनांक 8 जुलाई को पत्र प्रेषित किया गया था जिसके माध्यम से उत्तराखंड में गतिमान तिरस्तरीय पंचायत चुनाव में नगर निकाय चुनाव की मतदाता सूची में शामिल मतदाताओं को मतदान एवं नामांकन से रोके जाने के विषय में स्पष्ट दिशा निर्देश देने का अनुरोध किया था। जिसके जवाब से असंतुष्ट और पंचायती राज अधिनियम की धारा 9 की उप धारा 6 और 7 का पालन न करने के शिकायत याचिका करता ने माननीय उच्च न्यायालय से की है जिस पर कल सुनवाई होनी है की जिस मतदाता का नाम नगर निकाय एवं पंचायत सूची में भी है वह प्रत्याशी हो सकता है या नहीं।
देहरादून। राज्य निर्वाचन आयोग उत्तराखंड के संज्ञान में आया है कि विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों और अन्य इलेक्ट्रॉनिक संचार माध्यमों पर आगामी पंचायत चुनावों में उम्मीदवार की पात्रता के संबंध में भ्रामक सूचनाएं फैलाई जा रही हैं। विशेष रूप से, यह गलत प्रचार किया जा रहा है कि यदि किसी उम्मीदवार का नाम शहरी और ग्रामीण दोनों मतदाता सूचियों में है, तो उसकी उम्मीदवारी को लेकर विभिन्न अपात्रताएँ लागू होती हैं। यह भी भ्रम फैलाया जा रहा है की राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा पात्रता के संबंध में नए निर्देश जारी किए हैं।
इस संबंध में, जनसाधारण, संभावित उम्मीदवारों और मीडिया सहित सभी हितधारकों को सूचित एवं स्पष्ट किया जाता है कि उत्तराखंड में पंचायत चुनाव पूर्ण रूप से उत्तराखण्ड पंचायतीराज अधिनियम, 2016 (यथासंशोधित) के प्रावधानों के अनुसार ही संपन्न कराए जाते हैं। राज्य निर्वाचन आयोग स्वयं इस अधिनियम के प्रावधानों से निर्देशित है और अन्य सभी को भी इन्हीं प्रावधानों का पालन करना अनिवार्य है। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा पात्रता के संबंध में कोई नए निर्देश जारी नहीं किए हैं, जो निर्देश हैं वे पूर्व से पंचायती राज अधिनियम में प्रविधानित हैं। अधिनियम में किसी भी उम्मीदवार के निर्वाचन हेतु मतदाता सूची में पंजीकरण, मताधिकार, और निर्वाचित होने के अधिकार के संबंध में स्थिति स्पष्ट रूप से वर्णित है:
मत देने और निर्वाचित होने का अधिकार: अधिनियम की धारा 9(13) के अनुसार, व्यक्ति जिसका नाम ग्राम पंचायत के किसी प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र की निर्वाचक नामावली में सम्मिलित हो, उस ग्राम पंचायत में मत देने और किसी भी पद पर निर्वाचन, नाम-निर्देशन या नियुक्ति के लिए पात्र होगा । इसी प्रकार के स्पष्ट प्रावधान क्षेत्र पंचायत के लिए धारा 54(3) और जिला पंचायत के लिए धारा 91(3) में दिए गए हैं।
इसके अतिरिक्त, पंचायत चुनावों में किसी उम्मीदवार की निरर्हता (Disqualifications) से संबंधित प्रावधान केवल उत्तराखण्ड पंचायतीराज अधिनियम, 2016 की धारा 8 (ग्राम पंचायत के लिए), धारा 53 (क्षेत्र पंचायत के लिए), और धारा 90 (जिला पंचायत के लिए) में विस्तृत रूप से दिए गए हैं।अतः, सभी से अनुरोध है कि वे ऐसे निराधार प्रचार पर विश्वास न करें और केवल उत्तराखण्ड पंचायतीराज अधिनियम, 2016 के आधिकारिक प्रावधानों तथा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी सूचनाओं पर ही भरोसा करें। किसी भी प्रकार के संशय की स्थिति में, अधिनियम का अवलोकन करें अथवा जिला निर्वाचन अधिकारी एवं आयोग से संपर्क करें।
देहरादून। राज्य निर्वाचन आयोग ने बीते 27 जून के अपने आदेश को पलटते हुए नया आदेश जारी किया है। नये आदेश के तहत नगर निकाय व प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र का मतदाता को पंचायत चुनाव लड़ने से नहीं रोका जाएगा। इस नये आदेश के बाद शहरी इलाकों से पंचायत चुनाव में शिरकत कर रहे सैकड़ों दावेदारों के चेहरे खिल गए है। पूर्व में आयोग के सचिव ने निकाय के मतदाताओं के पंचायत चुनाव में भरे गए नामांकन पत्रों को निरस्त करने के आदेश दिए थे।
गौरतलब है कि नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य व प्रदेश अध्यक्ष करण मेहरा के पत्र का संज्ञान लेते हुए 27 जून को राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव राहुल गोयल ने साफ आदेश किया था कि निकाय का मतदाता पंचायत चुनाव में दावेदारी नहीं कर पाएंगे। इस आदेश से पंचायत चुनाव की पूरी तैयारी कर कर चुके निकाय के मतदाताओं के चेहरे लटक गए थे। इस आदेश से सत्तारूढ़ दल के चुनावी रणनीतिकारों को इस बात से भी गहरा झटका लगा था कि राज्य निर्वाचन आयोग ने कांग्रेस के पत्र पर त्वरित कार्रवाई कर विपक्ष को श्रेय दे दिया।
इसके बाद 2 जुलाई से पंचायत चुनाव के नामांकन का दौर शुरू हो गया। और नामांकन पत्रों की जांच व वापसी की अवधि में राज्य निर्वाचन आयोग ने छह जुलाई को नया आदेश कर निकाय के सैकड़ों दावेदारों को पंचायत चुनाव लड़ने की हरी झंडी दे दी।
त्रिस्तरीय पंचायत सामान्य निर्वाचन-2025 में नाम निर्देशन पत्रों की जांच के संबंध में राज्य निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आयोग के सचिव राहुल कुमार गोयल द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि यदि किसी प्रत्याशी का नाम एक से अधिक ग्राम पंचायतों, प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों या नगर निकाय की निर्वाचक नामावली में दर्ज है, तो केवल इस आधार पर उसका नामांकन पत्र अस्वीकृत नहीं किया जाएगा।
आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि नामांकन पत्रों की जांच के समय उत्तराखण्ड पंचायतीराज अधिनियम, 2016 की धारा 10(ख)(1), धारा 9(13), धारा 54(3) एवं धारा 91(3) के प्रावधानों का पालन किया जाए। इन धाराओं के अनुसार, किसी भी पद पर नामांकन करने या निर्वाचित होने के लिए उम्मीदवार का नाम संबंधित पंचायत क्षेत्र की निर्वाचक नामावली में दर्ज होना आवश्यक है और उसकी आयु कम से कम 21 वर्ष पूरी होनी चाहिए।
सचिव ने सभी जिलों के निर्वाचन अधिकारियों व सहायक निर्वाचन अधिकारियों से आग्रह किया कि इन निर्देशों से सभी को अविलंब अवगत कराना सुनिश्चित करें, ताकि जांच प्रक्रिया में एकरूपता बनी रहे और किसी पात्र प्रत्याशी का नामांकन गलत आधार पर निरस्त न हो।
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