7 दिन में यू-टर्न; महिला कांग्रेस के फैसले ने खड़े किए बड़े सवाल, लगातार हो रही चर्चाएं

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पहले ताज पहनाया फिर छीन लिया अधिकार; उत्तराखंड में महिला कांग्रेस संगठन की तस्वीर आखिर क्या कह रही?

देहरादून। उत्तराखंड प्रदेश महिला कांग्रेस के संगठनात्मक पुनर्गठन को लेकर अखिल भारतीय महिला कांग्रेस द्वारा जारी दो अलग-अलग आदेशों ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। 16 मई को जारी नियुक्ति आदेश को महज सात दिन बाद 23 मई को वापस लिए जाने के बाद पार्टी के भीतर संगठनात्मक स्थिरता और निर्णय प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
16 मई 2026 को अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष अलका लांबा द्वारा जारी कार्यालय आदेश में उत्तराखंड प्रदेश महिला कांग्रेस के पुनर्गठन की घोषणा की गई थी।

आदेश के तहत जया कर्नाटक को कार्यकारी अध्यक्ष एवं कुमाऊं जोन प्रभारी तथा आशा मनोरमा शर्मा को कार्यकारी अध्यक्ष एवं गढ़वाल जोन प्रभारी नियुक्त किया गया था। संगठन को आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर मजबूत बनाने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा था। फिर 23 मई को जारी नए कार्यालय आदेश में अखिल भारतीय महिला कांग्रेस ने 16 मई के आदेश तथा उसके आधार पर जारी सभी अनुवर्ती आदेशों को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया। नए आदेश में निर्णय वापस लेने के कारणों का उल्लेख नहीं किया गया है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि किसी संगठनात्मक निर्णय का इतने कम समय में वापस लिया जाना कई सवाल खड़े करता है। इसे पार्टी के भीतर चल रहे संगठनात्मक मंथन, आंतरिक असहमति या नए समीकरणों से जोड़कर भी देखा जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का यह भी मानना है कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस लगातार संगठन को मजबूत करने की बात कर रही है। ऐसे समय में नियुक्तियों और फिर उनके निरस्तीकरण से कार्यकर्ताओं के बीच भ्रम की स्थिति पैदा होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इससे संगठनात्मक स्तर पर संदेश और मनोबल दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार चुनावी सफलता के लिए मजबूत संगठन, स्पष्ट रणनीति और स्थिर नेतृत्व की आवश्यकता होती है। यदि संगठनात्मक फैसलों में लगातार अस्थिरता बनी रहती है तो इसका असर पार्टी की चुनावी तैयारियों पर भी पड़ सकता है। उधर, 23 मई के आदेश में सभी पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं से संगठन की एकता, अनुशासन और मजबूती बनाए रखने में सहयोग की अपील की गई है। इसे संगठन के भीतर समन्वय और संतुलन बनाए रखने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

राजनीतिक गलियारों में इस घटनाक्रम को कांग्रेस के मिशन-2027 से जोड़कर भी देखा जा रहा है। जानकारों का कहना है कि यदि संगठनात्मक फैसलों को लेकर इसी प्रकार की स्थिति बनी रही तो आगामी विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी की तैयारियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में कांग्रेस नेतृत्व के सामने संगठन में स्थिरता और कार्यकर्ताओं का भरोसा बनाए रखने की चुनौती और बढ़ गई है।
फिलहाल, 16 मई की नियुक्तियां निरस्त हो चुकी हैं और अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि महिला कांग्रेस उत्तराखंड में संगठनात्मक पुनर्गठन को लेकर अगला कदम क्या उठाती है।