आयकर विभाग ने खोज लिया बिल्डर रमेश बत्ता का ‘गुप्त ठिकाना’

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देहरादून। राजधानी देहरादून में बिल्डरों और शराब कारोबारियों के खिलाफ आयकर विभाग की लगातार छापेमारी ने बड़ा खुलासा कर दिया है। कार्रवाई तीसरे दिन थमने ही वाली थी कि अचानक विभागीय टीम के हाथ लग गए ऐसे कागजात, जिनसे पूरे ऑपरेशन की दिशा पलट गई। दस्तावेजों में मिले संकेतों ने बिल्डर रमेश बत्ता के एक ऐसे दफ्तर का पता दिया, जिसका अस्तित्व वह सालों से सभी जांच एजेंसियों से छुपाते आ रहे थे।
जैसे ही टीम को भनक लगी कि बल्लूपुर चौक के पास बनारस कैफे की बिल्डिंग में बत्ता का ‘अघोषित’ कार्यालय चलता है, पूरी इन्वेस्टिगेशन टीम वहीं पर टूट पड़ी और दफ्तर को तत्काल कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी गई।

कागजात ने खोल दिया नया पिटारा
सूत्रों के मुताबिक आयकर अधिकारी छापेमारी रोकने की आपचारिकता पूरी कर रहे थे। तभी छंटाई के दौरान कुछ अहम पेपर और डिजिटल दस्तावेज मिले, जिनकी क्रॉस–चेकिंग ने हड़कंप मचा दिया। नया लोकेशन कन्फ़र्म होते ही ऑपरेशन को बढ़ाने का फैसला हुआ। जिसके बाद दिल्ली और देहरादून के 20 ठिकानों पर रात तक टीमें जमी रहीं। विभाग को भरोसा है कि गुप्त दफ्तर से कई छुपी जानकारी, सौदे और लेन-देन के रिकॉर्ड मिल सकते हैं।

जप्ती का ब्योरा:
तीन करोड़ कैश और सात करोड़ के जेवर–बुलियन रियल एस्टेट नेटवर्क से जुड़े राकेश बत्ता, रमेश बत्ता, विजेंद्र पुंडीर, इंदर खत्री और शराब व्यवसायों से जुड़े कमल अरोड़ा व प्रदीप वालिया के ठिकानों से आयकर टीम अब तक तीन करोड़ रुपए से ज्यादा नकद, सात करोड़ रुपए से अधिक के आभूषण और बुलियन जब्त कर चुकी है। फिलहाल सब कुछ जांच पूरी होने तक विभाग की कस्टडी में रखा गया है।

पुराने घोषित आभूषणों पर सवाल—‘अगर पुराने थे तो बुलियन कैसे बने?’
पूछताछ में कई कारोबारी दावा कर रहे हैं कि ज्यादातर ज्वेलरी पहले से घोषित थी, कुछ तो 1997 में भी। लेकिन आयकर अधिकारियों ने सख्त सवाल दागा, “अगर ये आभूषण पहले घोषित थे, तो अब बुलियन या दूसरी फॉर्म में कैसे बदल गए? कौन-सी प्रोसेस अपनाई गई?” अब तक इस पर कोई ठोस जवाब नहीं मिल पाया है।
22 बैंक लॉकरों की जांच शुरू—‘कुंडली’ खंगाल रही टीम
विभाग को विभिन्न बिल्डरों और शराब कारोबारियों के 22 बैंक लॉकर भी मिले हैं। इन्हें खोला जा रहा है। प्राथमिक जानकारी के मुताबिक इनमें बड़ी मात्रा में दस्तावेज और आभूषण रखे हैं, जबकि कैश बेहद कम बताया जा रहा है।

​राजधानी में बड़ा एक्शन लेते हुए आयकर विभाग की टीम ने करोड़ों की टैक्स चोरी के शक में एमकेपी रोड और राजपुर रोड के प्रमुख ठिकानों पर सघन तलाशी जारी

​देहरादून। राजधानी देहरादून में बुधवार को आयकर विभाग (IT) की इन्वेस्टिगेशन टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए शहर के नामी बिल्डरों और शराब कारोबार से जुड़े प्रमुख व्यक्तियों के ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई कथित तौर पर करोड़ों रुपये के अघोषित लेन-देन और बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी के आरोपों के बाद अमल में लाई गई है।

​आयकर विभाग के विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, इन्वेस्टिगेशन विंग की अलग-अलग टीमें सुबह से ही बिल्डर और शराब कारोबारियों के व्यापारिक एवं आवासीय परिसरों पर डेरा डाले हुए हैं। जांच के दायरे में प्रमुख बिल्डर राकेश बत्ता, कमल अरोड़ा, इंदर खत्री, और प्रतिष्ठित कसीगा स्कूल के संचालक रमेश बत्ता शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, विभाग प्रमुख शराब कारोबारी कमल अरोड़ा और प्रदीप वालिया के यहां भी सघन तलाशी ले रहा है।

​प्रमुख ठिकाने रडार पर
​बताया जा रहा है कि विभाग की टीमें मुख्य रूप से शहर के पॉश इलाकों जैसे राजपुर रोड, एमकेपी रोड और द्वारका स्टोर क्षेत्र में स्थित ठिकानों पर जांच कर रही हैं। छापेमारी के दौरान, अधिकारी व्यापारिक दस्तावेजों, बैंक खातों के विवरण, डिजिटल रिकॉर्ड और अघोषित संपत्ति से संबंधित महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटा रहे हैं।

​प्रारंभिक सूचना के मुताबिक, यह कार्रवाई करोड़ों रुपये की अघोषित आय और बड़े ट्रांजेक्शन के इनपुट पर आधारित है। आयकर विभाग की इस व्यापक कार्रवाई से देहरादून के रियल एस्टेट और व्यापारिक जगत में हड़कंप की स्थिति है। छापेमारी देर शाम तक जारी रहने की संभावना है, जिसके बाद करोड़ों की बेनामी संपत्ति या अघोषित आय के बड़े खुलासे हो सकते हैं।