एक लाख के इनामी गैंगस्टर की गिरफ्तारी पर सवाल! थानाध्यक्ष और चौकी इंचार्ज लाइन हाजिर, संभावित साठगांठ की जांच शुरू

Astitva Times Desk
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देहरादून/ऊधमसिंह नगर। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अपराध जगत में तीन दशक तक दहशत का पर्याय रहे एक लाख रुपये के इनामी कुख्यात गैंगस्टर की उत्तराखंड में हुई गिरफ्तारी अब गंभीर विवादों में घिर गई है। गिरफ्तारी की परिस्थितियों और पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवालों के बीच ऊधमसिंह।नगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) ने आईटीआई कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक विक्रम राठौड़ और पैगा चौकी प्रभारी उपनिरीक्षक जसविंदर सिंह को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया है। इस कार्रवाई ने पूरे घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया है।

गिरफ्तारी की कहानी पर खड़े हुए सवाल
ऊधमसिंह नगर पुलिस ने बुधवार को ‘ऑपरेशन प्रहार’ के तहत दावा किया था कि आईटीआई थाना क्षेत्र के चैती मेला मार्ग स्थित एक पुरानी चौकी के पास खंडहर में पिलखन के पेड़ के नीचे छिपे कुख्यात गैंगस्टर योगेश मलिक उर्फ योगेश भदौड़ा को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार उसके कब्जे से एक जंग लगा .315 बोर का देसी तमंचा और तीन जिंदा कारतूस बरामद हुए। हालांकि इस गिरफ्तारी की पूरी कहानी पर उत्तर प्रदेश पुलिस और एसटीएफ ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, वर्षों से अत्याधुनिक हथियारों और सुरक्षा घेरे के साथ चलने वाला दुर्दांत अपराधी बिना किसी प्रतिरोध के इतनी आसानी से पकड़ा जाना कई अधिकारियों को अस्वाभाविक लगा। यही कारण रहा कि दोनों राज्यों की पुलिस के बीच विस्तृत सूचना साझा की गई और पूरे घटनाक्रम की समीक्षा शुरू हुई।

गिरफ्तारी के बाद उठे विवाद और विभागीय समीक्षा के उपरांत ऊधमसिंह नगर के एसएसपी अजय गणपति ने आईटीआई कोतवाली प्रभारी विक्रम राठौड़ तथा पैगा चौकी प्रभारी जसविंदर सिंह को लाइन हाजिर करने के आदेश जारी कर दिए। पुलिस समीक्षा में यह भी सामने आया कि प्रभारी निरीक्षक विक्रम राठौड़ पंजीकृत विवेचनाओं की निगरानी में लगातार लापरवाही बरत रहे थे तथा पीड़ितों की शिकायतों के निस्तारण में भी अनावश्यक देरी हो रही थी। इन प्रशासनिक कमियों के साथ-साथ अब उनकी भूमिका की विस्तृत विभागीय जांच भी कराई जाएगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार विक्रम राठौड़ के खिलाफ होने वाली विभागीय जांच केवल कार्यशैली तक सीमित नहीं रहेगी। जांच अधिकारियों को यह भी पता लगाने के निर्देश दिए गए हैं कि कहीं गैंगस्टर योगेश भदौड़ा और संबंधित पुलिस अधिकारियों के बीच किसी प्रकार का संपर्क, संरक्षण या साठगांठ तो नहीं थी। यदि जांच में किसी भी प्रकार की अनियमितता या मिलीभगत के प्रमाण मिलते हैं तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

कौन है योगेश भदौड़ा?
मेरठ जिले के रोहटा थाना क्षेत्र स्थित भदौड़ा गांव निवासी 53 वर्षीय योगेश मलिक उर्फ योगेश भदौड़ा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सबसे कुख्यात अपराधियों में गिना जाता है। पिछले तीन दशकों में उसने संगठित अपराध की दुनिया में अपना मजबूत नेटवर्क तैयार किया। उसके खिलाफ मेरठ, बागपत, बुलंदशहर, गाजियाबाद और सहारनपुर समेत कई जिलों में हत्या, हत्या के प्रयास, रंगदारी, लूट, गैंगस्टर एक्ट सहित 46 से अधिक गंभीर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। सहारनपुर के गंगोह थाने में दर्ज जानलेवा हमले के मामले में वह लंबे समय से फरार चल रहा था, जिस पर उत्तर प्रदेश पुलिस ने एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। इसके अलावा मेरठ के कंकरखेड़ा थाने में भी उसके विरुद्ध गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा लंबित है।

फिलहाल आईटीआई थाना पुलिस ने योगेश भदौड़ा के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत नया मुकदमा दर्ज किया है। लेकिन इस गिरफ्तारी से अधिक चर्चा उसकी गिरफ्तारी के तरीके और उससे जुड़े पुलिस अधिकारियों की भूमिका को लेकर हो रही है। दोनों राज्यों की पुलिस अब पूरे घटनाक्रम की अलग-अलग स्तर पर जांच कर रही हैं। माना जा रहा है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह गिरफ्तारी वास्तव में एक बड़ी पुलिस सफलता थी या फिर इसके पीछे कोई और कहानी छिपी हुई है। फिलहाल दोनों राज्यों की पुलिस और खुफिया एजेंसियों की नजर इस हाई-प्रोफाइल मामले पर बनी हुई है।

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