देहरादून। उत्तराखण्ड पंचायती राज अधिनियम-2016 में प्रस्तावित संशोधन को लेकर प्रांतीय विकास सेवा संगठन उत्तराखण्ड एवं ग्राम विकास अधिकारी एसोसिएशन ने सरकार के समक्ष अपना विरोध दर्ज कराया है। संगठनों के प्रतिनिधिमंडल ने ग्राम्य विकास, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपते हुए क्षेत्र पंचायत सचिव के रूप में खण्ड विकास अधिकारी (बीडीओ) की वर्तमान व्यवस्था को यथावत बनाए रखने की मांग की।
प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री को अवगत कराया कि वर्तमान में क्षेत्र पंचायत सचिव के रूप में बीडीओ की व्यवस्था वर्षों से प्रभावी ढंग से कार्य कर रही है और इसके माध्यम से विकास योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन तथा विभागीय समन्वय सुनिश्चित हो रहा है।उन्होंने कहा कि बीडीओ के स्थान पर सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) को क्षेत्र पंचायत सचिव बनाए जाने का प्रस्ताव न केवल प्रशासनिक व्यवस्था को प्रभावित करेगा, बल्कि क्षेत्र पंचायतों की कार्यकुशलता और विकास कार्यों की गति पर भी प्रतिकूल असर डाल सकता है।
संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि विकास खण्ड व्यवस्था ग्रामीण विकास की रीढ़ रही है। पिछले लगभग 75 वर्षों से विकास खण्डों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार, जनकल्याणकारी योजनाओं के संचालन तथा विकास कार्यों के प्रभावी क्रियान्वयन का महत्वपूर्ण दायित्व निभाया जा रहा है। ऐसे में वर्तमान व्यवस्था में बदलाव से प्रशासनिक एवं विकासात्मक गतिविधियों में अनावश्यक जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि बीडीओ विकास खण्ड स्तर पर विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने की महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। क्षेत्र पंचायत सचिव का दायित्व भी इसी समन्वयकारी व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा है। इसलिए इस व्यवस्था को बनाए रखना जनहित और ग्रामीण विकास दोनों की दृष्टि से आवश्यक है।
प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री से आग्रह किया कि प्रस्तावित संशोधन पर पुनर्विचार करते हुए क्षेत्र पंचायत सचिव के रूप में खण्ड विकास अधिकारी की वर्तमान व्यवस्था को बरकरार रखा जाए, ताकि ग्रामीण विकास की प्रक्रिया और अधिक प्रभावी एवं सुचारु रूप से संचालित होती रहे। इस अवसर पर प्रांतीय विकास सेवा संगठन के प्रदेश अध्यक्ष भरत चन्द्र भट्ट, महामंत्री मो. असलम सहित विभिन्न जनपदों के विकास अधिकारी, कर्मचारी एवं संगठन के अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।












