असम में रिकॉर्ड 85.38% मतदान, पुडुचेरी में सबसे अधिक 89.81%, केरल में 78.01% वोटिंग

Astitva Times Desk
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तीनों राज्यों में शांतिपूर्ण मतदान संपन्न, भारी भागीदारी ने बढ़ाया चुनावी रोमांच

नई दिल्ली। असम, केरल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव के तहत मतदान शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हो गया। इस बार तीनों क्षेत्रों में मतदाताओं ने बढ़- चढ़कर हिस्सा लिया, जिसके चलते कई जगहों पर रिकॉर्ड मतदान दर्ज किया गया। चुनाव आयोग के अनुसार, असम में 85.38 प्रतिशत, केरल में 78.01 प्रतिशत और पुडुचेरी में 89.81 प्रतिशत मतदान हुआ।असम में इस बार मतदान ने नया रिकॉर्ड बनाया है। 126 विधानसभा सीटों पर हुए चुनाव में 85 प्रतिशत से अधिक वोटिंग दर्ज की गई। कई जिलों में मतदान प्रतिशत 90 के करीब पहुंच गया। राज्य में सत्तारूढ़ दल लगातार तीसरी बार सरकार बनाने की कोशिश में है, जबकि विपक्ष ने भी कड़ी चुनौती पेश की है। उच्च मतदान को राजनीतिक विश्लेषक निर्णायक जनादेश का संकेत मान रहे हैं।

वहीं, केरल में 140 सीटों के लिए हुए मतदान में 78.01 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई। राज्य में पारंपरिक रूप से उच्च मतदान होता रहा है और इस बार भी यह रुझान कायम रहा। यहां मुख्य मुकाबला वाम लोकतांत्रिक मोर्चा, यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट और भाजपा के बीच माना जा रहा है। कई क्षेत्रों में मतदान 80 प्रतिशत के आसपास रहा, जो मतदाताओं की सक्रियता को दर्शाता है।

पुडुचेरी में 30 विधानसभा सीटों पर हुए मतदान में 89.81 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई, जो तीनों में सबसे अधिक है। केंद्र शासित प्रदेश के चारों क्षेत्रों—पुडुचेरी, कराईकल, माहे और यनम—में मतदाताओं का उत्साह देखने को मिला। चुनावी मुकाबला मुख्य रूप से सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्ष के बीच केंद्रित रहा।

तीनों राज्यों में चुनाव की सबसे खास बात यह रही कि सभी जगह मतदान शांतिपूर्ण रहा। सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे और संवेदनशील बूथों पर अतिरिक्त बल तैनात किया गया। कहीं से भी बड़ी हिंसा या गड़बड़ी की खबर नहीं मिली। चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब सभी की नजर मतगणना पर टिकी है। माना जा रहा है कि उच्च मतदान प्रतिशत चुनावी नतीजों को रोचक बना सकता है और कई सीटों पर कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है।

असम, केरल और पुडुचेरी में रिकॉर्ड स्तर पर हुए मतदान ने यह साफ कर दिया है कि मतदाता लोकतांत्रिक प्रक्रिया के प्रति पूरी तरह जागरूक हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह भारी मतदान किसके पक्ष में जाता है और किसे सत्ता की जिम्मेदारी मिलती है।

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