राजनाथ के इशारे से बलूनी समर्थकों में खुशी, त्रिवेंद्र रावत, भट्ट एवं टम्टा समर्थक टेंशन में

MS Malik
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रक्षा मंत्री ने किसके लिए कहा -आप सिर्फ सांसद नहीं चुन रहे है.. अक्लमंद को इशारा काफी..

देहरादून। लोकसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान में अभी दो दिन बाकी हैं। और लोकसभा चुनाव का परिणाम (4 जून) आने में लगभग डेढ़ महीना। लेकिन उत्तराखंड भाजपा के गलियारे में केंद्र में मंत्री बनाने को लेकर अंदरूनी गुणा भाग अभी से ही शुरू हो गया है। इसे कहते हैं, सूत न कपास जुलाहों में लठ्ठम लठ्ठा।

फिर भी, इस गुणा भाग की शुरुआत रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के सप्ताह भर पहले गोपेश्वर की चुनावी जनसभा के बाद से हुई। इस चुनावी जनसभा में राजनाथ सिंह ने सार्वजनिक तौर पर इशारों ही इशारों में जनता को समझा दिया कि आप केवल सांसद नहीं चुन रहे हैं…फिर दोहरा रहा हूँ… आप सिर्फ सांसद नहीं चुन रहे है…वाह रे उत्तराखण्ड … अक्लमंद को इशारा काफी.. यानि कि अनिल बलूनी को केंद्र में बड़ी जिम्मेदारी मिलेगी। भाजपा के वरिष्ठतम नेता राजनाथ सिंह के इस खुले बयान के बाद पौड़ी सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी गणेश गोदियाल से कड़ी चुनावी जंग में उलझे बलूनी समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गयी।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के इस बयान के पीछे बलूनी के चुनाव को उठाना भी एक बड़ा कारण माना जा रहा है। लेकिन केंद्रीय नेता के बलूनी के पक्ष में दिए गए इस कथन के बाद अन्य भाजपा प्रत्याशी पूर्व सीएम त्रिवेंद्र रावत , केंद्रीय मंत्री अजय भट्ट व टम्टा के समर्थक बेचैन नजर आ रहे हैं।

त्रिवेंद्र समर्थकों को उम्मीद है कि चुनाव जीतने के बाद हरिद्वार क्षेत्र को कैबिनेट में जगह मिलेगी। वैसे भी देश भर में लोकसभा चुनाव लड़ रहे भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्रियों को जीतने पर केंद्र में मंत्री बनने की चर्चा आम है।

गौरतलब है कि पूर्व में निशंक को हरिद्वार से केंद्रीय शिक्षा मंत्री बनाया गया था। हालांकि, बाद में निशंक को मोदी मंत्रिमंडल से ड्राप कर दिया गया। लेकिन इस बार चुनाव जीतने पर फिर से हरिद्वार संसदीय सीट को मौका मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। अमित शाह से त्रिवेंद्र के पुराने सम्बन्धों का हवाला भी दिया जाने लगा है।

ठीक ऐसे ही अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ से भाजपा प्रत्याशी अजय टम्टा भी मोदी कैबिनेट का हिस्सा रहे। लेकिन बाद में हटा दिया गया।

इधर, नैनीताल-उधमसिंहनगर सीट से भाजपा प्रत्याशी अजय भट्ट मौजूदा मोदी कैबिनेट में रक्षा राज्यमंत्री हैं। भट्ट समर्थकों को भी पूरी आशा है कि चुनाव जीतने के बाद केंद्र में मंत्री बनने का फिर से मौका मिलेगा। इन सभी कयासों के बीच राजनाथ सिंह के इशारे भर से अन्य दावेदारों के कैंप में हलचल मच गई है। चुनाव जीतने पर बलूनी को केंद्र की कुर्सी मिलती है तो त्रिवेंद्र रावत को सिर्फ सांसद बन कर रहना होगा। ऐसे में अजय भट्ट को भी मन मसोस कर रहना पड़ेगा।

बहरहाल, रक्षा मंत्री व धीर गंभीर नेता राजनाथ सिंह के सीमान्त इलाके में किये गए इशारे भर से भाजपा की अंदरूनी राजनीति में मतदान से पहले ही कुर्सी की अंदरूनी जंग शुरू हो गयी है।

यहां यह भी गौरतलब है कि बलूनी को तीरथ सिंह रावत व त्रिवेंद्र को निशंक का टिकट काटकर चुनावी अखाड़े में उतारा गया है। दोनों ही पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ रहे हैं।

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