नई दिल्ली। कर्नाटक में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण और अपडेशन प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर फॉर्म-7 (Form-7) के दुरुपयोग का मामला सामने आया। विभिन्न जिलों में वास्तविक मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से कटवाने के उद्देश्य से कथित तौर पर फर्जी और भ्रामक आवेदन जमा करने के आरोप में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ पुलिस में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई हैं।
क्या है पूरा मामला?
चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे मतदाता सूची संशोधन अभियान के दौरान विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में अचानक हजारों की संख्या में फॉर्म-7 जमा किए जाने लगे। जब संबंधित बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) ने इन आवेदनों का भौतिक सत्यापन किया, तो पाया गया कि कई जीवित और लंबे समय से एक ही पते पर रह रहे लोगों को “स्थान छोड़ चुके (Shifted)”, “अनुपस्थित (Absent)” या “मृत” दिखाकर उनके नाम हटाने की मांग की गई थी। स्थानीय निवासियों और सामाजिक संगठनों के विरोध के बाद यह बात सामने आई कि एक खास वर्ग और क्षेत्रों के योग्य मतदाताओं के नाम सूची से गायब करने की नीयत से ये फर्जी फॉर्म जमा कराए गए थे।किन-किन जिलों में दर्ज हुई कार्रवाई?
बेलगावी (Belagavi):
बेलगावी मार्केट पुलिस स्टेशन में भाजपा नेता रवि बी. पाटिल और उनके सहयोगियों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की गई है। आरोप है कि लगभग 198 मुस्लिम मतदाताओं के फर्जी हस्ताक्षर और झूठे कारण दिखाकर फॉर्म-7 जमा कराए गए थे, ताकि उनका मताधिकार छीना जा सके।
मैसूरु (Mysuru):
मैसूरु के नरसिम्हाराजा विधानसभा क्षेत्र में स्थानीय भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के नेता अनिल थॉमस व अन्य के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज की गई। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि उनके पूरे परिवार को “स्थान परिवर्तित” बताकर वोटर लिस्ट से हटाने की साजिश रची गई।
बीदर और भालकी (Bidar & Bhalki):
बीदर जिले के भालकी निर्वाचन क्षेत्र में लगभग 3,000 से अधिक मतदाताओं के नाम पर आपत्ति जताते हुए संदिग्ध फॉर्म-7 जमा किए गए थे। चुनाव अधिकारियों की प्राथमिक जांच में फर्जीवाड़े की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।फॉर्म-7 के दुरुपयोग पर कैसे होती है कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई?
मतदाता सूची से किसी वैध नागरिक का नाम साजिशन कटवाना या फर्जी जानकारी देकर फॉर्म-7 जमा करना एक संगीन अपराध है। इसके खिलाफ चुनाव आयोग और पुलिस प्रशासन निम्नलिखित चरणों में कार्रवाई करते हैं:
1. भौतिक सत्यापन (Physical Verification)
घर-घर जाकर सत्यापन
जब किसी इलाके में अचानक असामान्य संख्या में फॉर्म-7 प्राप्त होते हैं, तो बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) सीधे संबंधित मतदाता के घर पहुंचते हैं। यदि मतदाता वहां मौजूद मिलता है, तो फर्जी आपत्ति को तुरंत निरस्त (Reject) कर दिया जाता है।
2. कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice)
सबूत मांगने की प्रक्रिया
गलत या फर्जी जानकारी देकर फॉर्म जमा करने वाले आवेदक को निर्वाचक निबंधन अधिकारी (ERO) द्वारा नोटिस जारी किया जाता है। उनसे आपत्ति के समर्थन में ठोस दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा जाता है।
3. पुलिस FIR की कार्रवाई
आपराधिक मामला दर्ज होना
फर्जी दस्तावेज, जाली हस्ताक्षर या झूठे कारण पाए जाने पर ERO या चुनाव अधिकारी संबंधित पुलिस स्टेशन में आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और चुनाव कानूनों के तहत FIR दर्ज कराते हैं।
4. धाराओं के तहत सजा का प्रावधान
जेल और जुर्माना
दोषी पाए जाने पर जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 (झूठी घोषणा पर 1 साल तक की सजा या जुर्माना) तथा BNS की धोखाधड़ी (Cheating) और जाली दस्तावेज तैयार करने (Forging Documents) की धाराओं में मुकदमा चलाया जाता है।
5. प्रशासनिक अनुशासन
कर्मचारियों पर गाज
यदि किसी BLO या चुनाव कर्मचारी की लापरवाही या साठगांठ पाई जाती है, तो उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर विभागीय जांच शुरू की जाती है।राजनीतिक घमासान और आयोग का रुख
मामले के तूल पकड़ते ही राज्य में सियासी बयानबाजी तेज हो गई। सत्तारूढ़ कांग्रेस का आरोप है कि यह एक खास वर्ग को मताधिकार से वंचित करने की संगठित साजिश है। वहीं भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनके कार्यकर्ता केवल पारदर्शी वोटर लिस्ट बनाने में आयोग की मदद कर रहे थे और व्यक्तिगत स्तर पर हुई किसी गलती का बचाव नहीं किया जाएगा।
कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने साफ किया है कि डिजिटल ट्रैकिंग के जरिए बल्क (एक साथ बड़े पैमाने पर) आवेदन करने वालों को चिन्हित किया जा रहा है और बिना पुख्ता भौतिक जांच के किसी भी योग्य मतदाता का नाम सूची से नहीं काटा जाएगा। साथ ही आगे भी फार्म 7 के जरिये फर्जी आपत्ति लगाने वालों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।










