लालू यादव को मिली जमानत, चारा घोटाला केस में तीन वर्ष बाद आएंगे बाहर

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नई दिल्ली। राष्ट्रीय जनता दल पार्टी के प्रमुख लालू प्रसाद यादव को झारखंड हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है। दुमका कोषागार में 3.13 करोड़ रुपये की निकासी के मामले में शनिवार को जमानत मिल गई है। वह फिलहाल चारा घोटाला मामले में सजा काट रहे हैं। उन्हें एक लाख रुपए का मुचलका और 10 लाख रुपए जुर्माना भरना होगा। बेल बॉन्ड भरने के बाद वे एक-दो दिन में जेल से बाहर आ जाएंगे। चईबासा और देवघर कोषागार मामले में लालू को पहले से ही जमानत मिली हुई है। दोरांडा कोषागार के मामले में अब भी ट्रायल जारी है। अब लालू यादव के जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है।

आपको बता दें कि लालू यादव को सात साल की जेल की सजा सुनाई गई थी। लालू आधी सजा काट चुके हैं जिसके बाद उन्हें जमानत दी गई है। जस्टिस अप्रेश सिंह ने लालू यादव 42 महीने और 11 दिन जेल में रहे हैं। यह आधी सजा से ज्यादा का समय है। उन्होंने कहा कि लालू यादव एक-एक लाख के दो सिक्योरिटी बॉन्ड और आईपीसी और पीसी एक्ट के तहत पांच-पांच लाख का जुमार्ना भरने के बाद जेल से बाहर आ सकेंगे।

लालू यादव के बेटे तेज प्रताप ने ट्विटर पर लिखा
गरीबों, वंचितों, पिछड़ों का रहनुमा आ रहा है
बता दो अन्याय करने वालों को की हमारा नेता आ रहा है…#LaluYadavIsBack

— Tej Pratap Yadav (@TejYadav14) April 17, 2021

बता दें कि 72 वर्षीय लालू प्रसाद को करीब 18 तरह की बीमारियां हैं. इनमें टाइप टू डायबिटीज, हाइपरटेंशन, पेरिएनल एब्सेस, किडनी इंज्यूरी एंड क्रोनिक किडनी डिजीज, पोस्ट वॉल्व रिप्लेसमेंट, प्रोस्थेटिक हाइपर प्लेसिया, सेकेंड्री डिप्रेशन, लो बैक डिफ्यूज डिस्क, लेफ्ट आई इमैच्योर कैटरेक्ट, राइट लोवर पोल रेनल, प्राइमरी ओपन एंगल ग्लूकोमा, हाइट्रोजेनस थैलेसिमिया, विटामिन डी डिफिशिएंसी समेत ग्रेड वन फैटी लिवर की बीमारियां शामिल हैं।

कोर्ट ने लालू के सामने 2 शर्तें रखी हैं

  1. जमानत के दौरान लालू कोर्ट से परमिशन लिए बिना देश से बाहर नहीं जाएंगे।
  2. वे अपना मोबाइल नंबर और अपना पता भी नहीं बदलेंगे।

एम्स में भर्ती हैं लालू
लालू यादव फिलहाल एम्स दिल्ली में इलाज करवा रहे हैं। करीब ढाई साल रिम्स रांची में इलाज कराने के बाद जनवरी में उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। सीने में दर्द और सांस लेने में परेशानी के चलते उन्हें 23 जनवरी 2021 को रिम्स से एम्स रेफर किया गया था।

चारा घोटाले में कब-क्या हुआ?
27 जनवरी 1996: पशुओं के चारा घोटाले के रूप में सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये की लूट का पता चला। चाईबासा ट्रेजरी से गलत तरीके से 37.6 करोड़ रुपए निकाले गए थे।
11 मार्च 1996: पटना हाईकोर्ट ने चारा घोटाले की जांच के लिए उइक को निर्देश दिए।
19 मार्च 1996: सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश की पुष्टि करते हुए हाईकोर्ट की बेंच को निगरानी करने को कहा।
27 जुलाई 1997: उइक ने लालू प्रसाद यादव पर शिकंजा कसा।
30 जुलाई 1997: लालू प्रसाद ने उइक अदालत के सामने सरेंडर किया।
19 अगस्त 1998: लालू और राबड़ी देवी के खिलाफ आय से ज्यादा संपत्ति का मामला दर्ज कराया गया।
4 अप्रैल 2000: लालू के खिलाफ आरोप पत्र दर्ज हुआ और राबड़ी देवी को सह-आरोपी बनाया गया।
5 अप्रैल 2000: लालू और राबड़ी ने सरेंडर किया, राबड़ी को जमानत मिली।
9 जून 2000: कोर्ट में लालू के खिलाफ आरोप तय हुए।
अक्टूबर 2001: सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड के अलग राज्य बनने के बाद मामले को नए राज्य में ट्रांसफर कर दिया। इसके बाद लालू ने झारखंड में सरेंडर किया।
18 दिसम्बर 2006: लालू और राबड़ी को आय से अधिक संपत्ति के मामले में क्लीन चिट मिली।
2000 से 2012 तक: मामले में करीब 350 लोगों की गवाही हुई। इस दौरान कई गवाहों की मौत हो गयी।
17 मई 2012: उइक कोर्ट में लालू नए आरोप तय हुए। इसमें दिसम्बर 1995 और जनवरी 1996 के बीच दुमका ट्रेजरी से 3.13 करोड़ रुपए की निकासी का मामला भी शामिल।
17 सितम्बर 2013: चारा घोटाला मामले में रांची की विशेष अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा।
30 सितम्बर 2013: चारा घोटाला मामले में लालू प्रसाद यादव दोषी करार दिए गए।

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