दून में जमीन के खेल पर प्रशासन का शिकंजा! बड़ी संख्या में खसरा नंबरों की खरीद -फरोख्त पर रोक

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पछवादून के अकेले 52 खसरे प्रतिबंधित; PACL और Golden Forest की विवादित जमीनों से भी रहें दूर, रजिस्ट्री से पहले रिकॉर्ड खंगालने की अपील

देहरादून। देहरादून में जमीन खरीदने की तैयारी कर रहे हैं तो जरा ठहरिए! कहीं जिस जमीन को आप जीवनभर की कमाई लगाकर खरीदने जा रहे हैं, वह सरकारी रिकॉर्ड में प्रतिबंधित तो नहीं? प्रशासन ने जिले में 73 खसरा नंबरों की जमीन की खरीद-फरोख्त पर रोक होने की जानकारी देते हुए आम लोगों को सतर्क किया है। इनमें विकासनगर क्षेत्र के 52 खसरा नंबर शामिल हैं। प्रशासन की इस चेतावनी के बाद जमीन कारोबार से जुड़े लोगों और संभावित खरीदारों के लिए सतर्कता बढ़ गई है। खासकर PACL और Golden Forest से जुड़ी संपत्तियों को लेकर खरीदारों को विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है। इन संपत्तियों से संबंधित कानूनी विवाद लंबे समय से चले आ रहे हैं और प्रतिबंध के बावजूद कथित तौर पर कुछ मामलों में इनके सौदे कराने के प्रयास सामने आते रहे हैं।

रजिस्ट्री से पहले खसरा नंबर देखना जरूरी
प्रशासन ने साफ किया है कि जमीन खरीदते समय सिर्फ जमीन की लोकेशन, सड़क, बाजार और कीमत देखकर फैसला न करें। सबसे पहले यह पता करना जरूरी है कि जिस भूखंड का सौदा किया जा रहा है, उसका खसरा नंबर सरकारी प्रतिबंधित सूची में तो शामिल नहीं है। प्रतिबंधित खसरों की सूची ई-रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर उपलब्ध कराई गई है। संबंधित सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों में भी सूची चस्पा की गई है। खरीदार सौदा करने से पहले इन माध्यमों से जमीन की स्थिति की पुष्टि कर सकते हैं। जिले में प्रतिबंधित बताए गए 73 खसरा नंबरों में से 52 खसरा नंबर विकासनगर क्षेत्र के हैं। इसके अलावा अलग-अलग न्यायालयों और हाईकोर्ट के आदेशों के चलते भी कुछ संपत्तियों की खरीद -फरोख्त पर रोक लगी हुई है। यानी किसी जमीन की रजिस्ट्री संभव दिखाई दे रही हो, तब भी उसके पीछे कोई न्यायिक आदेश, स्वामित्व विवाद या अन्य कानूनी पाबंदी है या नहीं—इसकी स्वतंत्र जांच करना खरीदार के लिए जरूरी है।


PACL- Golden Forest की जमीन पर विशेष नजर
देहरादून और आसपास के क्षेत्रों में PACL और Golden Forest से जुड़ी जमीनें लंबे समय से विवादों में रही हैं। संबंधित मामलों में निवेश योजनाओं और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े आरोपों के बाद इन संपत्तियों को लेकर कानूनी कार्रवाई हुई। प्रशासन की चेतावनी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रतिबंधित संपत्तियों के कथित फर्जी सौदों के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में ऐसे मामलों को लेकर अलग-अलग थानों में करीब 25 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। करीब चार वर्ष पहले एसटीएफ ने भी प्रतिबंधित जमीनों के कथित फर्जी सौदों से जुड़े एक गिरोह का खुलासा किया था। इस साल फरवरी में भी PACL की संपत्ति बेचने से संबंधित मामले में पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की थी।

दलाल की बात नहीं, सरकारी रिकॉर्ड पर करें भरोसा
जमीन खरीदने वालों के लिए सबसे बड़ा खतरा यही है कि कई बार सौदा कराने वाला व्यक्ति जमीन को विवादमुक्त बताकर खरीदार को भरोसे में ले लेता है। लेकिन बाद में राजस्व रिकॉर्ड या न्यायालयी आदेश सामने आने पर मामला उलझ सकता है। ऐसे में प्रशासन ने लोगों से आग्रह किया है कि किसी भी प्रॉपर्टी डीलर या बिचौलिए की जानकारी को अंतिम न मानें। जमीन की स्थिति की पुष्टि सरकारी रिकॉर्ड और संबंधित कार्यालय से स्वयं करें। प्रशासन की चेतावनी केवल 73 खसरों तक सीमित नहीं है। आरक्षित वन भूमि और नदी क्षेत्र की जमीन को लेकर भी खरीदारों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। जिले के विभिन्न क्षेत्रों में आरक्षित वन भूमि और नदी क्षेत्र की जमीन को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं। रायपुर और ऋषिकेश समेत कई इलाकों में ऐसी संपत्तियों को लेकर मामले सामने आने के कारण जमीन की श्रेणी और स्थिति की जांच बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
इन इलाकों में खरीदारी से पहले रिकॉर्ड जरूर जांचें
प्रशासन ने कुछ क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए जमीन की श्रेणी और कानूनी स्थिति की विशेष जांच की जरूरत बताई है। इनमें—
अजबपुर कलां — श्रेणी E
मोथरोवाला — श्रेणी C
लच्छीवाला फ्लाईओवर से डोईवाला टाउन एरिया तक — श्रेणी वन
बलवीर रोड — श्रेणी A
हिमालयन अपार्टमेंट
चाय बाग, कोलागढ़
मिट्ठी बेहड़ी — श्रेणी C
लक्ष्मण चौक — श्रेणी C
बंजारावाला — श्रेणी A
इन क्षेत्रों में जमीन खरीदने से पहले संबंधित भूखंड की वास्तविक श्रेणी, राजस्व रिकॉर्ड और कानूनी स्थिति की जांच करना जरूरी है।

खरीदारों के लिए प्रशासन का सीधा संदेश
एडीएम वित्त केके मिश्रा ने लोगों से जमीन में निवेश करने से पहले पूरी जांच-पड़ताल करने की अपील की है। प्रशासन की ओर से प्रतिबंधित खसरों की सूची ऑनलाइन उपलब्ध कराई गई है और संबंधित सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों में भी इसकी जानकारी रखी गई है।

‘सस्ती जमीन’ का लालच कहीं महंगा न पड़ जाए!
जमीन खरीदना आम आदमी के लिए जिंदगी की सबसे बड़ी आर्थिक डील में से एक होता है। ऐसे में थोड़ी सी जल्दबाजी वर्षों की कमाई को कानूनी विवाद में फंसा सकती है।
इसलिए जमीन खरीदने से पहले तीन चीजें सबसे पहले जांचें—खसरा नंबर, मालिकाना हक और जमीन की कानूनी स्थिति।
लोकेशन अच्छी है या कीमत सस्ती—यह बाद की बात है। पहले यह सुनिश्चित करें कि जमीन कानूनी रूप से खरीदने योग्य भी है या नहीं।