पूर्व सीएम के निधन पर प्रदेश में तीन दिन का राजकीय शोक घोषित, बुधवार को स्कूल कॉलेज भी रहेंगे बंद

Astitva Times Desk
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पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी के निधन पर सरकार ने जारी किए आदेश, 20 मई को बंद रहेंगे सरकारी कार्यालय और शिक्षण संस्थान

देहरादून। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ राजनेता मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी के आकस्मिक निधन पर राज्य सरकार ने पूरे प्रदेश में तीन दिन का राजकीय शोक घोषित किया है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार 19 मई से 21 मई 2026 तक समस्त सरकारी कार्यालयों में राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा तथा इस अवधि में किसी भी प्रकार के शासकीय मनोरंजन कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जाएंगे।

अपर सचिव महावीर सिंह चौहान द्वारा जारी शासनादेश में कहा गया है कि मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी के सम्मान में राज्य सरकार ने यह निर्णय लिया है। आदेश की प्रतिलिपि सभी प्रमुख सचिवों, जिलाधिकारियों, पुलिस महानिदेशक और विभागाध्यक्षों को भेजते हुए निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है।

20 मई को रहेगा सार्वजनिक अवकाश जैसा माहौल
शासनादेश के अनुसार पूर्व मुख्यमंत्री का अंतिम संस्कार 20 मई 2026 को पुलिस सम्मान के साथ किया जाएगा। इसी दिन राज्य सरकार के सभी कार्यालय बंद रहेंगे। राजकीय शोक के चलते सरकारी स्तर पर किसी भी प्रकार के सांस्कृतिक या औपचारिक कार्यक्रम आयोजित नहीं होंगे।

स्कूल-कॉलेज भी रहेंगे बंद
माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. मुकुल कुमार सती द्वारा जारी अलग आदेश में राज्य के सभी शासकीय, अशासकीय और निजी शिक्षण संस्थानों को भी निर्देश जारी किए गए हैं। आदेश में कहा गया है कि 20 मई 2026 को प्रदेश के सभी विद्यालय, शिक्षण संस्थान और शिक्षा विभाग के कार्यालय बंद रहेंगे। शिक्षा विभाग ने सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों, मंडलीय अधिकारियों तथा संबंधित विभागों को निर्देशित किया है कि शासन के आदेशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराया जाए।

मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी के निधन की खबर से पूरे उत्तराखंड में शोक की लहर है। उन्हें एक ईमानदार, अनुशासित और विकासोन्मुख नेता के रूप में याद किया जाता है। सेना से राजनीति तक का उनका सफर प्रेरणादायी माना जाता रहा है। राज्य गठन के बाद उत्तराखंड की राजनीति में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। राज्य सरकार द्वारा घोषित तीन दिवसीय राजकीय शोक को उनके सार्वजनिक जीवन और योगदान के प्रति सम्मान के रूप में देखा जा रहा है।

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