यूपी समेत कईं राज्यों के विरोध के चलते सस्ता पेट्रोल डीजल मिलने की उम्मीद टूटी

MS Malik
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GST काउंसिल की बैठक में कोविड से जुडी़ 12 अन्य चीजों पर मिली राहत

लखनऊ। राजधानी लखनऊ में जीएसटी (गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स) काउंसिल की 45वीं बैठक वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में शुक्रवार को आयोजित हुई। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत की उम्मीद लगाए बैठे लोगों को बड़ा झटका लगा है। बैठक में पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने पर सहमति नहीं बन पाई है। असल में यूपी महाराष्ट्र, केरल जैसे राज्य पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने के प्रस्ताव पर खुलकर सामने आ गए थे। इसे देखते हुए आज की बैठक में पेट्रोल-डीजल पर फैसला टल गया है।

लखनऊ के ताज होटल में जीएसटी काउंसिल की 45 वीं बैठक केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में आयोजित हुई। इस बैठक में जैसे ही पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया तो कईं राज्य इसके विरोध में खड़े हो गए। उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, झारखंड, छत्तीसगढ़ आदि राज्यों ने पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे से बाहर रखने की मांग की। जिसके चलते इस पर फैसला आगे के लिए टल गया।

बैठक से पहले ही उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि वह पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने का विरोध करेंगे। काउंसिल की बैठक से पहले वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा था कि उत्तर प्रदेश पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स को जीएसटी के अंतर्गत लाने के खिलाफ है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाया जाता है तो पेट्रोल ₹28 और डीजल ₹25 तक सस्ता हो जाएगा। राज्यों के विरोध करने का बड़ा कारण इस से मिलने वाला लाभ है। इसी कारण अधिकांश राज्य पेट्रोल एवं डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने के पक्ष में नहीं है।

जीएसटी काउंसिल की बैठक देश में कोरोना महामारी के प्रकोप के बाद पहली फिजिकल बैठक थी। इस बैठक में कई अहम मुद्दों पर विचार किया गया। इससे पिछली बैठक 12 जून को वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के जरिए हुई थी। जिसमें कोविड-19 महामारी के खिलाफ जंग में अहम कई आइटम्स पर जीएसटी रेट्स में कटौती करने का फैसला किया गया था। आज की बैठक में इस छूट को 3 महीने के लिए और बढ़ाया गया है।

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि पेट्रोल डीजल को जीएसटी में शामिल करने का अभी सही समय नहीं है। सीतारमण ने जानकारी देते हुए कहा कि बच्चों की दो लाइफ सेविंग दवाई पर जीएसटी नही लगाने का फैसला किया गया है। इस बैठक में बायोडीजल पर जीएसटी घटाकर 5 फीसदी करने को मंजूरी मिली है। मेटल पर जीएसटी 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 18 प्रतिशत करने पर भी फैसला हुआ है। सरकार ने ‘एक देश-एक दाम’ के तहत पेट्रोल-डीजल, नेचुरल गैस और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (विमान ईंधन) को GST के दायरे में लाने पर विचार किया था। बैठक में 48 से ज्यादा वस्तुओं पर टैक्स दरों की समीक्षा हुई।

यह चीजें हुईं सस्ती?

ऑक्सीमीटर पर 12% से घटाकर 5% किया।

हैंड सेनिटाइजर पर 18% से घटाकर 5% टैक्स।

वेंटिलेटर पर 12% से घटाकर 5% किया।

रेमडेसिविर पर 12% से 5% किया।

मेडिकल ग्रेड ऑक्सीजन पर 12% से घटाकर 5%।

पल्स ऑक्सीमीटर पर 12% से घटाकर 5% टैक्स किया है।

ऑक्सीजन कंसंट्रेटर पर टैक्स की दर को 12% से घटाकर 5% किया है।

इलेक्ट्रिक फर्नेसेज पर टैक्स को 12% से घटाकर 5% किया है।

तापमान मापने के यंत्र पर 12% से घटाकर 5% टैक्स किया है।

हाई-फ्लो नेजल कैनुला डिवाइस पर टैक्स को 12% से घटाकर 5% किया है।

हेपारीन दवा पर टैक्स 12% से घटाकर 5% किया है।

कोविड टेस्टिंग किट पर 12% के बजाए 5% टैक्स किया है।

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